मुरली इंडस्ट्रीज व उसके 18 प्रमोटर्स सहित 28 लोगों पर 11 करोड़ रुपए की बाजार रेगुलेटर सेबी ने पेनाल्टी लगाई

मुरली इंडस्ट्रीज व उसके 18 प्रमोटर्स सहित 28 लोगों पर 11 करोड़ रुपए की बाजार रेगुलेटर सेबी ने पेनाल्टी लगाई

पूंजी मार्केट नियामक सेबी ने मंगलवार को मुरली इंडस्ट्रीज व इसके 18 प्रमोटर्स सहित कुल 28 लोगों पर 11 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई है. यह पेनाल्टी टेकओवर नियमों के उल्लंघन के मुद्दे में लगाई गई है. जिन लोगों पर पेनाल्टी लगाई गई है उसमें प्रमोटर्स बजरंगलाल मालू, बजरंग बी मालू, दिनेश मालू, लालचंद मालू, लालचंद बी मालू, मधु सुनील मालू, महेश मालू का समावेश है. यह सभी प्रमोटर्स हैं.

इसी तरह प्रमोटर्स के अन्य सदस्यों में मुरली मालू, नंदलाल मालू, निर्मला देवी मालू, प्रेमादेवी मालू, संगीता देवी मालू, सरिता मालू, शांतिदेवी मालू, शिल्पा मालू, शोभा मालू, सुनील कुमार मालू का समावेश है.

प्रमोटर्स के अतिरिक्त 10 व लोगों पर पेनाल्टी

इनके अतिरिक्त रुंचिका अलायज एंड स्टील, इंको इंफ्रा, रामजी एग्री बिजनेस, अंबाजी पेपर्स, कन्हैया माइनिंग, कृष्णम इनवेस्टमेंट, लखी पैकेजिंग, सिंपल माइनिंग, टाइटन मैनेजमेंट व रामकृष्णा फैब्रिकेशन का समावेश है. इन सभी को कंपनी के शेयरों को खरीदने के एवज में टेकओवर के नियमों के तहत खुलासा करना था. इन लोगों ने 15 दिसंबर 2006 को शेयरों को खरीदा था. लेकिन इन लोगों ने इस तरह का कोई खुलासा नहीं किया.

शेयरों को खरीदने व बेचनेवाले एक दूसरे से कनेक्टेड थे

सेबी की जाँच में पाया गया कि जिन लोगों ने शेयरों को खरीदा व जिन लोगों ने बेचा, वे सभी एक दूसरे से पहले से ही कनेक्टेड थे. इसके मुताबिक प्रमोटर्स के अतिरिक्त जो 10 लोग थे, उनके पास कुल 29.83 फीसदी शेयर था. जबकि प्रमोटर्स ग्रुप की होल्डिंग मिला दें तो इसके साथ ही कुल होल्डिंग 85.18 फीसदी हो जाती है. सेबी के मुताबिक मुरली इंडस्ट्रीज ने शेयरों के प्रफरेंशियल अलॉटमेंट से पहले साइकाम से 4.86 करोड़ रुपए 5 लोगों ने भिन्न भिन्न लिया. इसके एवज में इन लोगों ने मुरली इंडस्ट्रीज के 5 लाख इक्विटी शेयरों को गिरवी रख दिया था.

पांच लोगों का कोई बिजनेस नहीं था

हालांकि गिरवी रखने से पहले मुरली इंडस्ट्रीज के प्रमोटर्स को 1.5 लाख शेयर सभी से भिन्न-भिन्न लेना था. इस तरह से कुल 5 लोगों से 7.5 लाख शेयर मुरली इंडस्ट्रीज को लेना था. सेबी की जाँच में पाया गया कि ये सभी लोग आपस में कनेक्टेड थे व इन्होंने एक दूसरे को बाद की तारीख का चेक भी दे रखा था. लेकिन बाद में यह सब एक ही लोग निकले. बाद में पता चला कि जो पांच लोग थे, उनका कोई बिजनेस नहीं था व वे लोग आईसीडी लेने की पोजीशन में नहीं थे.

सेबी ने मधुलिका को बिना गारंटी 28.27 करोड़ रुपए दिया

सेबी ने बोला कि मुरली इंडस्ट्रीज ने 28.27 करोड़ रुपए मधुलिका को बिना किसी कोलैटरल के 20 नवंबर 2007 को लोन दिया था. हालांकि मधुलिका ने यह राशि तुरंत पांच लोगों कन्हैया, रुनिचा, रामजी, इंको व अंबाजी को को ट्रांसफर कर दिया. इसमें से मधुलिका ने सवा लाख रुपए अपने पास रख लिया. इससे यह पता चला कि प्रमोटर ने जो प्लांट व मशीनरी के लिए ट्रांसफर की बात कही थी, वह झूठा निकला. मधुलिका ने कभी भी इस पैसे का उपयोग प्लांट या मशीनरी के लिएनहीं किया. मधुलिका को इस मुद्दे में केवल फ्रंट एंटिटीके रूप में ट्रांसफर करने के लिए उपयोग किया गया था.

कई कनेक्टेड कंपनियों का प्रबंधन सीए राजा कर रहे थे

सेबी ने पाया की सभी कनेक्टेड कंपनीज का प्रबंधन अमित राजा कर रहे थे. राजा सीए थे व जाँच में पाया गया कि इनका सभी के साथ कनेक्शन था. यही नहीं, कई व कंपनियां भी इसी तरह कनेक्टेड थीं. सेबी ने पाया कि मुरली इंडस्ट्रीज व प्रमोटर्स ने इन कनेक्टेड कंपनियों के लिए फंडिंग की व्यवस्था की. यह एक मोडस ऑपरेंडी थी.

मुरली इंडस्ट्रीज ने रामकृष्णा को 1.82 करोड़ रुपए दिए

बैंक खाते से पता चला कि 2007 में मुरली इंडस्ट्रीज ने कुल 1.82 करोड़ रुपए रामकृष्णा को ट्रांसफर किया. रामकृष्णा कंपनी भीएक दूसरे से कनेक्टेड थी. यह सभी कनेक्टेड कंपनीज मुरली इंडस्ट्रीज के शेयर में कारोबार कर रही थी.10 कनेक्टेड कंपनियां एक दूसरे से कनेक्शन में थीं. इसमें कंपनी के प्रमोटर्स भी थे. सेबी ने यह भी पाया कि साइकाम ने पांच कनेक्टेड एंटीटीज को