विश्वव्यापी कोरोना वायरस के संकट ने गांव के लोगो मे बैठाया यह बड़ा खौफ

विश्वव्यापी कोरोना वायरस के संकट ने गांव के लोगो मे बैठाया यह बड़ा खौफ

विश्वव्यापी कोरोना वायरस के संकट ने सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर दिया है. एक प्रदेश से दूसरे राज्यों में जाने वालों लोगों के अतिरिक्त एक जिले से दूसरे जिले में जाने वाले लोगों को भी संदेह की नजरों से देखा जा रहा है. 

यहां तक कि मुंबई से सटे रत्नागिरी व सिंधुदुर्ग जिले के लोग भी नहीं चाहते कि मुंबई के लोग गांव में आकर यहां कोरोना वायरस फैलाए. इसके मद्देनजर प्रदेश में सभी जिलों की सीमाएं सील कर दी गई हैं.


प्रदेश में कोरोना वायरस के लिए गठित नियंत्रण कक्ष के प्रभारी प्रमुख सचिव भूषण गगराणी ने सोमवार को बताया कि मुंबई के लोगों के कोकण या अन्य जिलों में जाने पर कांटैक्ट ट्रैसिंग से संक्रमण बढ़ने का खतरा है. इससे गंभीर संकट पैदा हो जाएगा. वैसे भी गांव के लोग नहीं चाहते कि मुंबई में रहने वाले गांव में आएं. इसलिए प्रदेश के सभी जिलों की सीमाओं को सील कर दिया गया है. विशेष अनुमति के बिना किसी को दूसरे जिले की सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं है. ब्यूरो 

प्रवासी मजदूरों से मेडिकल प्रमाण लेटर के नाम पर वसूली

लॉकडाउन के चलते मुंबई-ठाणे व आसपास क्षेत्रों में फंसे प्रवासी मजदूरों से मेडिकल प्रमाण लेटर के नाम पर 100 रुपये से 700 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. दरअसल, मुंबई महानगर क्षेत्र में प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए मेडिकल प्रणाम लेटर जरूरी है. इसके लिए व्यक्तिगत चिकित्सक भी अधिकृत हैं, लेकिन उनकी फीस तय नहीं है.
ऐसे में श्रमिकों से मनमानी वसूली हो रही है. आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने आरोप लगाया, मजदूरों से वसूली को लेकर सरकार, लोकल निकाय व पुलिस से शिकायत की लेकिन इसका प्रभाव नहीं हो रहा. वहीं, महाराष्ट्र में कोराना वायरस को लेकर गठित कंट्रोल रूम के प्रभारी प्रमुख सचिव भूषण गगराणी ने बोला कि सरकार जल्द ही इस बारे में कोई निर्णय लेगी.

 महाराष्ट्र से जाँच के बाद तीन हजार मेहनतकश उत्तर प्रदेश पहुंचे

महाराष्ट्र में फंसे तीन हजार मेहनतकश सोमवार को यूपी पहुंच गए. रेलवे के अनुसार दो ट्रेनों से 21,27 मजदूरों को गोरखपुर पहुंचाया गया जबकि नागपुर में फंसे 1021 मजदूरों को लखनऊ पहुंचाया गया.

प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए सभी की प्रारंभिक जाँच के बाद सरकारी बसों से घर भेज दिया. सरकार ने इसके लिए 44 बसों को लगाया था.  ट्रेन से आने वाले अधिकांश यात्री  गोरखपुर, बस्ती, मुरादाबाद, प्रयागराज व सोनभद्र के थे. सभी को सैनिटाइज बस में उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया. वहीं महाराष्ट्र सरकार ने बताया है कि अब तक प्रदेश में फंसे करीब 35 हजार लोगों को उनके घर के लिए रवाना किया गया है.