नौकरी के अनचाहे प्रेशर से दिल की बीमारी का खतरा, अगर नापसंद जॉब की तो दिल की बीमारी का है खतरा

नौकरी के अनचाहे प्रेशर से दिल की बीमारी का खतरा, अगर नापसंद जॉब की तो दिल की बीमारी का है खतरा

अगर आपको कोई ऐसी नौकरी करनी पड़ रही है जिसे आप नापसंद करते हैं तो सावधान हो जाइए. रिपोर्ट के मुताबिक एक रिसर्च में बोला गया है कि इससे आपको दिल की बीमारी हो सकती है.

4 लाख नौकरीपेशा लोगों पर की गई स्टडी
इसके लिए अमेरिका में 4 लाख नौकरीपेशा लोगों का अध्ययन किया गया. इसमें मुख्य रूप से दिल पर पड़ने वाले प्रभाव पर फोकस किया गया. इसमें पाया गया कि ऐसी नौकरी में जब आप अपने बॉस पर भरोसा नहीं करते तो आसार है कि आप धूम्रपान करने लगेंगे. ऐसे में हाई ब्लड प्रेशर, डायबीटीज, असंतुलित खानपान, फैट की चर्बी व हाई कलेस्ट्रॉल की शिकायत देखने को मिलती है.

काम के लिए बेहतर माहौल है जरूरी
रिसर्च में बोला गया है कि कार्य के लिए बेहतर माहौल बेहद महत्वपूर्ण है. साथ ही बॉस व स्टाफ के बीच तालमेल, सम्मान व गैर भेदभाव वाला रवैया बहुत ज्यादा अर्थ रखता है. उल्लेखनीय है कि दुनियाभर में सबसे ज्यादा मौतें दिल की बीमारी से ही होती हैं.

  • आज हार्ट अटैक व दिल से संबंधित बीमारियों में दिनोंदिन वृद्धि होती जा रही है. हार्ट संबंधी बीमारियां महिलाओं, पुरुषों वबुजुर्गों के अतिरिक्त युवाओं तक में फैल गईं हैं. हार्ट अटैक के बाद शरीर में बहुत ज्यादा परिवर्तन आते हैं, व ये परिवर्तनऐसे हैं जो आपकी चिंता व बढ़ा सकते हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में:

  • हार्ट अटैक के बाद पहले 28 दिन यानी पहला 1 महीना बेहद ज़रूरी होता है. जिन लोगों को हार्ट अटैक होता है, अच्छा होने के बाद उनमें हार्ट फेल व दिल संबंधी अन्य बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है. इसलिए ज़रूरी है हमेशा चिकित्सक के टच में रहें व डिस्चार्ज होने के बाद भी ट्रीटमेंट बंद न हो.

  • हार्ट अटैक से उबरने के बाद सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि आप यह समझें कि हार्ट अटैक हुआ क्यों? इसके लिए ज़रूरी है कि आप थोड़ा-सा पीछे मुड़ें व उन वजहों व चीज़ों पर गौर करें, जिनकी वजह से दिल की बीमारी हुई. यह बात उन लोगों के मुद्देमें थोड़ी ज़्यादा गंभीर हो जाती है, जो कम आयु में ही हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं. इसके लिए ज़रूरी है कि चिकित्सकसे विस्तृत चर्चा की जाए व सलाह ली जाए कि कैसे स्ट्रेस के बिना जीवन जी जाए.

  • हार्ट अटैक से उबरने के बाद भले ही एक नॉर्मल जीवन जीने की प्रयास की जाए, लेकिन यह भी हकीकत है कि मानसिक तौर पर चिंता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. दिमाग में बार-बार यही चलता रहता है कि आखिर हार्ट अटैक हुआ क्यों? कहीं यह फिर से तो नहीं होगा?

  • आप जितने ऐक्टिव होकर कोई भी फिजिकल वर्क कर पाते थे, हार्ट अटैक के बाद ऐसा नहीं कर सकते. कोई भी भारी कार्यया फिर एक्सर्साइज़ करने से पहले आपको सौ दफा सोचना पड़ेगा क्योंकि हार्ट अटैक के बाद आप भले ही एक नॉर्मल जीवन जीने लगें, लेकिन आपके हार्ट यानी दिल को नॉर्मल होने में वक्त लगेगा.

  • जहां पहले छाती में हल्का-सा दर्द होने पर भी आप उसे नज़रअंदाज़ कर देते थे, वहीं हार्ट अटैक के बाद ऐसा नहीं हो पाता.ज़रा-सा भी दर्द छाती में हुआ तो आपकी नींद उड़ जाएगी व लगेगा कि कहीं यह हार्ट अटैक का लक्षण तो नहीं?

  • हार्ट अटैक के बाद सामान्य ज़िंदगी में जो सबसे बड़ा परिवर्तन आता है, वह है दवाई. आपका रूटीन पूरी तरह से बदल जाता है. खान-पान व लाइफस्टाइल के साथ आपको अपनी दवाई व उसके डोज़ का भी ध्यान रखना पड़ता है.

  • हार्ट अटैक के बाद स्ट्रेस व टेंशन बढ़ जाती है, जिसका सीधा प्रभाव सेक्शुअल ड्राइव व लिबिडो पर फर्क पड़ता है. कई लोगों को भय लगता है कि कहीं संभोग की वजह से उन्हें दूसरा हार्ट अटैक ही न आ जाए, लेकिन जब बॉडी व हार्ट को पूरी तरह से रेस्ट मिल जाएगा, तो संभोग संबंधी यह कठिनाई दूर हो सकती है.