वार्मअप करते समय रखे इन बातों का ध्यान होगा फायदा

वार्मअप करते समय रखे इन बातों का ध्यान होगा फायदा

आज की जीवनशैली में प्रतिदिन थोड़ी-बहुत अभ्यास या वर्कआउट करना महत्वपूर्ण है. कई लोग अपने फिटनेस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिम भी जाते हैं. लेकिन वहां वर्कआउट के दौरान वे कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जिनकी वजह से उन्हें नुकसान होने कि सम्भावना है. आज डाक्टर सीमा ग्रोवर बता रही हैं उन 6 प्रमुख गलतियों के बारे में जिनसे बचा जाना चाहिए :

  1. वार्मअप के लिए पर्याप्त समय दीजिए. यह कम से कम 5 मिनट का होना चाहिए. सवाल है कि आखिर वार्मअप करने से क्या होगा, जबकि हम जिमिंग तो करने ही वाले हैं? दरअसल, वर्कआउट के दौरान बॉडी के तापमान व हार्ट रेट में बेहद बढ़ोतरी हो जाती है. अगर यह बढ़ोतरी आकस्मित से होगी तो शरीर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. वार्मअप करने से आपका शरीर आगे की एक्टिविटी के लिए तैयार होता है. वार्मअप के रूप में स्क्वैट, पुश अप व बाउंसिंग जैक किया जा सकता है.

  2. एक्सरसाइज से शरीर का तापमान ही नहीं, हार्ट रेट व ब्रीदिंग रेट भी ज्यादा हो जाती है. अगर इसे सामान्य किए बगैर तुरंत जिम से बाहर निकल जाएंगे तो चक्कर आ सकते हैं व बॉडी को अन्य नुकसान भी हो सकते हैं. इसलिए कूल डाउन करना भी महत्वपूर्ण है. इसके लिए भी कम से कम 5 मिनट का समय देना चाहिए. इस दौरान हल्की वॉक या हल्की स्ट्रेचिंग करें. इससे शरीर को वापस सामान्य स्थिति में आने में मदद मिलती है.

  3. अगर आप जिम में अभ्यास करने आए हैं तो पर्याप्त समय लेकर आइए. कई लोग ऐसे होते हैं जो जल्दबाजी के फेर में एक सेट से दूसरे सेट के बीच रेस्ट पीरियड का ध्यान नहीं रखते हैं. दो सेट्स के बीच लगभग दो मिनट का रेस्ट टाइम महत्वपूर्ण है ताकि मसल्स फंक्शन व हर सेट में परफॉर्मेंस मेंटेन रहे. अगर दो सेट के बीच पर्याप्त आराम नहीं देंगे तो पहले सेट में तो बेहतर परफॉर्म करेंगे, लेकिन होने कि सम्भावना है दूसरे में ऐसा न कर पाए.

  4. जिम में पर्याप्त समय लेकर जरूर जाएं, लेकिन अति भी नहीं करें. अगर आप बॉडी बिल्डर नहीं हैं या प्रोफेशनली किसी फिजिकल एक्टिविटी से जुड़े नहीं हैं व केवल अपनी फिटनेस के लिए जिमिंग कर रहे हैं तो किसी भी स्थिति में एक घंटे से ज्यादा वर्कआउट मत कीजिए. इस एक घंटे में वार्मअप, मुख्य एक्सरसाइज, साइड एक्सरसाइज, सेट्स के बीच रेस्टिंग टाइम व कूल डाउन टाइमिंग सभी शामिल हैं. ज्यादा समय वर्कआउट करने से मसल्स में टूट-फूट बढ़ सकती है.

  5. अगर आपको लगता है कि एक ही तरह के वर्कआउट कर उनमें पारंगत हो जाएंगे व बेहतर नतीजे पा लेंगे तो गलत सोच रहे हैं. एक ही तरह के वर्कआउट थकान भरे हो सकते हैं. आप अपने अभ्यास रुटीन में लगातार परिवर्तन करते रहें. यह परिवर्तन अभ्यास के प्रकार में या उसकी इंटेंसिटी में अथवा सेट्स के बीच अंतराल में, किसी भी रूप में होने कि सम्भावना है. आवश्यकता केवल इतनी है कि अपनी बॉडी की वर्कआउट के प्रति अनुकूलता को चुनौती देते रहें.

  6. जिमिंग में कई तरह के वर्कआउट्स होते हैं. इनमें कुछ वार्मअप्स होते हैं, तो कुछ साइड एक्सरसाइजेस होती हैं जैसे लिफ्टिंग सेशन, प्लैंक्स, सूट अप्स आदि. कई लोग अपनी कोर यानी मुख्य अभ्यास से पहले ये साइड अभ्यास भी करने लगते हैं. लेकिन यह बड़ी गलती है. इससे आप अपनी एनर्जी का बड़ा भाग इन छोटी अभ्यास में खर्च कर देंगे. बेहतर होगा कि वार्मअप्स के बाद सीधे आप मुख्य अभ्यास करें.