पहलवान बजंरग पूनिया बोले- मेरा लक्ष्य रैंकिंग नहीं, ओलंपिक पदक

पहलवान बजंरग पूनिया बोले- मेरा लक्ष्य रैंकिंग नहीं, ओलंपिक पदक

युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग रैंकिंग के 65 किलोग्राम भारवर्ग में संसार के नम्बर-1 पहलवान हिंदुस्तान के बजरंग पूनिया का बोलना है कि वह अपनी हालिया रैंकिंग से बहुत ज्यादा खुश हैं, लेकिन रैकिंग उनका लक्ष्य नहीं, वह तो देश के लिए ज्यादा से ज्यादा पदक, खासकर ओलंपिक पदक जीतना चाहते हैं. बजंरग ने बोला कि देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतने को लेकर वह बहुत ज्यादा फोकस्ड हैं. वह रैंकिंग को कभी अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने देना चाहते व खुद को बेहतर से बेहतरीन बनाने के लिए हर समय अपना ध्यान मैट पर लगाए रखना चाहते हैं.

बजरंग ने साक्षात्कार में कहा, “वर्ल्ड नम्बर-1 बनकर अच्छा लगता है लेकिन मुझ पर उसका दबाव नहीं रहता. मेरे लिए ठीक अर्थ में रैंकिंग अर्थ नहीं रखता. मेरा लक्ष्य सिर्फ सर्वश्रेष्ठ देना व देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना है. रैंकिंग में नंबर-1 हैं, यह सोच कर अच्छा लगता है कि इससे ज्यादा कुछ नहीं लेकिन मेरा लिए असल लक्ष्य कुछ व है.”

यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने इस बार जो रैकिंग निकाली है, उसमें इस बार हिंदुस्तान के 15 पहलवान शामिल हैं. इससे पहले कभी हिंदुस्तान के इतने पहलवानों ने शीर्ष-10 में स्थान नहीं बनाई थी. बजरंग अपने साथी खिलाड़ियों के भी बहुत ज्यादा खुश हैं व उनका मानना है कि इससे बाकी के खिलाड़ियों को अच्छा करने की प्ररेणा मिलेगी.

बजरंग ने कहा, “इस बात से साबित होता कि भारतीय कुश्ती आगे बढ़ रही है. हमारे पहलवान शीर्ष-10 में हैं. यह हिंदुस्तान के लिए खुशखबरी है. यह समाचार बाकी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत होगी कि ये लोग नंबर-1, नंबर-2 हैं. इससे हर किसी को आगे जाने के लिए आत्मबल मिलेगा.”

बजंरग ने पिछले महीने की आरंभ में न्यूयार्क के मैडिसन स्क्वॉयर पर मुकाबला लड़ा था, जिसमें वह अमेरिका के यिआनी दियाकोमिहालिस से 8-10 से पराजय गए थे. पराजय के बाद भी बजरंग ने इतिहास रचा था. वह मैडिसन स्क्वॉयर पर लड़ने वाले हिंदुस्तानके पहले पहलवान बन गए थे. बजंरग ने बोला कि मैडिसन स्क्वॉयर पर लड़ना उनके लिए अलग तरह का अनुभव रहा.

बकौल बजरंग, “मेरा मेडिसन स्क्वॉयर का अनुभव शानदार था. मैं हिंदुस्तान का पहला पहलवान था, जो वहां जाकर खेला. मुझे अमेरिकी कुश्ती महासंघ ने वहां आमंत्रित किया था. मैंने वहां पर बहुत ज्यादा कुछ सीखा. मुकाबला बहुत ज्यादा कड़ा हुआ था. एक ऐसा अनुभव रहा, जिसे मैं हमेशा याद रखूंगा. हिंदुस्तान के लोग वहां मैच देखने आए थे लेकिन ज्यादा नहीं थे. जितने भी थे सभी ने मेरा हौसला बढ़ाया.”

बजरंग खुद को निखारने व अधिक से अधिक एक्सपोजर के लिए लगातार विदेशों में ट्रेनिंग करते रहते हैं. वह हाल ही में वह अमेरिका में ट्रेनिंग करके लौटे हैं. विदेशों में ट्रेनिंग को लेकर बजरंग ने कहा, “मैंने अमेरिका में ट्रेनिंग भी की. उसका अनुभव भी अच्छा रहा. बहुत ज्यादाकुछ नया सीखा. ट्रेनिंग वैसे तो एक जैसी ही होती है. वहां का मौसम अच्छा है. हिंदुस्तान में इस समय गमीर् है तो यहां ट्रेनिंग करना कठिनहो जाता है.”

23 जून (रविवार) को दुनिया ओलम्पिक दिवस मनाया जा रहा है. इस विशेष दिन के बारे में पूछने पर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवान ने कहा, “मैं तो अपनी तैयार कर रहा हूं. मेरे लिए तो ओलम्पिक डे तब होगा जब मैं ओलम्पिक पदक जीतूंगा. लेकिन खुशी होती है कि यह दिन मनाया जाता है क्योंकि ओलम्पिक बहुत ज्यादा बड़ा खेल मंच है.”