आगरा में नट समाज की महिला की मृत्यु के बाद परिवार वालों को नही मिली दफनाने की जगह

आगरा में नट समाज की महिला की मृत्यु के बाद परिवार वालों को नही मिली दफनाने की जगह

 यूपी (Uttar Pradesh) में जातिवाद (Casteism) का मानवता पर भारी पड़ने का मुद्दा सामने आया है। आगरा में नट समाज की महिला की मृत्यु के बाद परिवार वालों ने गांव के एक शमशान में उनकी चिता बनाई थी। 

मुखाग्नि देने की तैयारी चल रही थी, तब तक सवर्ण समाज के कुछ लोग वहां पहुंच गए। आरोप है कि उन लोगों ने अंतिम संस्कार (Funeral) जबरन रुकवा दिया। हंगामे के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। इसके बाद भी वहां चिता नहीं जली। पुलिस की मौजूदगी में बेबस नट समाज ने महिला का मृत शरीर चिता से उतारा व दूसरी स्थान अंतिम संस्कार किया।

जानकारी के मुताबिक, मुद्दा आगरा के अछनेरा क्षेत्र के रायभा का है। अब इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।  बताया जा रहा है कि अछनेरा क्षेत्र में 25 वर्ष की पूजा पत्नी राहुल की मृत्यु हो गयी थी। महिला का मृत शरीर लेकर परिजन श्मशान पहुंचे। कुछ ही देर में ठाकुर समाज के लोग आकर विरोध करने लगे। आख़िरकार नट समाज को चिता से महिला का मृत शरीर निकलवाकर वापस भिजवा दिया गया। मृत शरीर को चिता से निकाल कर नट समाज के लोगों ने दूसरी स्थान अंतिम संस्कार किया।

आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं
विवाद के बाद अछनेरा पुलिस मौके पर पहुंच गई। उसने हंगामा को रुकवा तो दिया, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में विवश होकर तहसील किरावली गांव रायभा में नट समाज की महिला के मृत शरीर का चिता से निकालकर दूसरी स्थान पर अंतिम संस्करा करना पड़ा। खास बात यह है कि देहांत होने के बाद उच्च समाज की श्‍मशान धरती पर मृत शरीर जलाने को लेकर टकराव में मौके पर पहुंची पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया। साथ ही पीड़ित परिवार की मदद भी नहीं की।
खंडवा में भी रोका था रास्ता
बता दें कि वर्ष 2016 में कुछ इसी तरह की समाचार मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में सामने आई थी, जहां एक दलित महिला की मृत्यु के बाद गांव के दबंगों ने उनकी शवयात्रा रोक दी थी। करीब दो घंटे तक चले टकराव के बाद पुलिस की मौजूदगी में महिला का अंतिम संस्कार किया गया था। धनगांव थाना क्षेत्र के डोंगरगांव में एक दलित महिला मैदाबाई (70) का लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी। परिजन कावेरी नदी पर बने गौ घाट पर महिला का अंतिम संस्कार करने करना चाहते थे। गौ घाट पर जाने का रास्ता गांव के दबंग परिवार सुंदरलाल गुर्जर के खेत से होकर जाता है। आरोप है कि सुंदरलाल के बेटे व परिवार की दो महिला सदस्यों ने शवयात्रा का रास्ता रोक दिया व मैदाबाई के परिजनों को अपने खेत से गुजरने नहीं दिया था।